ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ॥ प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः ॥
मंत्र का अर्थ
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ॐ कृष्णाय – श्रीकृष्ण को नमन
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वासुदेवाय – वसुदेव के पुत्र को प्रणाम
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हरये – सभी दुखों और बंधनों को हरने वाले
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परमात्मने – समस्त ब्रह्मांड के आत्मा
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प्रणतः क्लेशनाशाय – भक्तों के क्लेश का नाश करने वाले
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गोविंदाय नमो नमः – गोविंद को बार-बार नमस्कार
इस मंत्र का अर्थ है – “हे श्रीकृष्ण! हे वासुदेव के पुत्र! आप ही परमात्मा हैं, समस्त क्लेश और दुखों को दूर करने वाले गोविंद को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।”
महत्व
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कष्ट निवारण: यह मंत्र जीवन के दुःख, मानसिक तनाव और कष्टों को कम करने वाला माना जाता है।
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भक्ति और श्रद्धा: श्रीकृष्ण की शरण में ले जाने वाला मंत्र है।
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आध्यात्मिक उन्नति: नियमित जप से मन शुद्ध होता है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
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सकारात्मक ऊर्जा: यह मंत्र नकारात्मक विचारों को दूर करके जीवन में आनंद और संतुलन लाता है।
जप विधि
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सुबह स्नान कर साफ स्थान पर बैठें।
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दीपक और अगरबत्ती जलाकर श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
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108 बार इस मंत्र का जप करें।
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शनिवार और बुधवार को विशेष फलदायी माना जाता है।
लाभ
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मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है।
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पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में सौहार्द बढ़ता है।
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कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
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आध्यात्मिक साधना में प्रगति होती है।
निष्कर्ष
यह मंत्र केवल एक स्तुति नहीं बल्कि श्रीकृष्ण की शरण में जाने का मार्ग है। नियमित जप से भक्त के जीवन में भक्ति, शांति और सुख का वास होता है।
FAQs
1. यह मंत्र किसे समर्पित है?
यह मंत्र श्रीकृष्ण को समर्पित है, जिन्हें वासुदेव के पुत्र और परमात्मा कहा जाता है।
2. इस मंत्र का उच्चारण कब करना चाहिए?
सुबह स्नान के बाद शांत वातावरण में या बुधवार और शनिवार को विशेष रूप से करना उत्तम है।
3. मंत्र का कितनी बार जप करना चाहिए?
108 बार जप करना श्रेष्ठ माना जाता है।
4. इस मंत्र का मुख्य लाभ क्या है?
यह भक्त के मानसिक, पारिवारिक और आध्यात्मिक कष्टों को दूर करता है और जीवन में शांति लाता है।
5. क्या महिलाएं भी यह मंत्र जप सकती हैं?
हाँ, यह मंत्र सभी के लिए है। कोई भी श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका जप कर सकता है।